विरोध में धरने पर बैठे कांग्रेसी
विधानसभा सत्र शुरू होते ही प्रधान संगठन और यूकेडी ने भी खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र शुरू होते ही सियासत गरमा गई। सदन के भीतर सरकार के सामने विधायी कामकाज और बजट से जुड़ी चुनौतियां हैं, तो बाहर विपक्ष ने विरोध का मोर्चा खोल दिया। विधानसभा घेराव के लिए भराड़ीसैंण कूच कर रहे कांग्रेसियों को पुलिस ने बैरियर पर रोक दिया। इससे नाराज कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गए। उधर, मुख्य मार्ग पर प्रधान संगठन और उत्तराखंड क्रांति दल ने भी प्रदर्शन कर सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं। सत्र के पहले ही दिन विरोध के इन स्वरों ने सरकार को राजनीतिक रूप से असहज कर दिया।
विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर बैरियर पर रोक दिया। आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलने पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वहीं धरना शुरू कर दिया। गोदियाल और माहरा के धरने पर बैठने से विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक धार मिली। कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर साफ संकेत दिया कि वह विधानसभा सत्र को सरकार के खिलाफ जनहित के मुद्दे उठाने के अवसर के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है।
विपक्ष के लिए यह सत्र इसलिए भी अहम है, क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के कामकाज को जनता के बीच मुद्दा बनाने की कोशिश तेज हो रही है। बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार और बुनियादी सुविधाओं जैसे सवालों पर सरकार को घेरने की रणनीति के बीच कांग्रेस का घेराव कार्यक्रम राजनीतिक दबाव बनाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इन मुद्दों पर सरकार का पक्ष और सत्र में होने वाली चर्चा ही तय करेगी कि विपक्ष अपने अभियान को कितना प्रभावी बना पाता है।
विधानसभा सत्र के पहले दिन मुख्य मार्ग पर प्रधान संगठन और उत्तराखंड क्रांति दल के प्रदर्शन ने भी माहौल को गरमा दिया। अलग-अलग संगठनों के सड़क पर उतरने से सरकार के सामने विरोध के कई मोर्चे खुल गए। इन प्रदर्शनों ने क्षेत्रीय मांगों और पहाड़ की समस्याओं को लेकर जारी असंतोष को भी सामने रखा। भराड़ीसैंण में राजनीतिक गतिविधियों के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है। विधानसभा के दो दिवसीय सत्र को लेकर गैरसैंण क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने भी सवाल खड़े किए। कुछ लोगों ने सत्र को सियासी पिकनिक करार देते हुए कहा कि इतने कम समय की कार्यवाही से पहाड़ की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। उन्होंने सत्र पर होने वाले खर्च और बजट के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। स्थानीय लोगों की नाराजगी ने गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने के उद्देश्य और उसके वास्तविक लाभ को लेकर बहस तेज कर दी है।
गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा मिलने के बाद से ही यहां विधानसभा सत्रों को पहाड़ की आकांक्षाओं और विकास की उम्मीदों से जोड़कर देखा जाता रहा है। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि राजधानी में होने वाली बैठकों का लाभ केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित न रहे, बल्कि रोजगार, पलायन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के रूप में दिखाई दे। ऐसे में सत्र की अवधि से लेकर उसके नतीजों तक पर उठते सवाल सरकार के लिए अहम हैं।
